जामिया के छात्रों व पुलिस में हिंसक झड़प

 


जामिया के छात्रों व पुलिस में हिंसक झड़प


नई दिल्ली। नागरिकता संशोधन अधिनियम के खिलाफ देश के उत्तर-पूर्वी राज्यों में चल रहे विरोध प्रदर्शन की आंच शुक्रवार को दिल्ली पहुंच गई। जामिया मिल्लिया इस्लामिया विश्वविद्यालय से संसद की तरफ कूच करने की कोशिश कर रहे छात्रों की पुलिस से हिंसक झड़प हो गई। पुलिस ने जहां लाठियां भांजीं, वहीं जवाब में छात्रों ने पथराव किया। आखिर प्रदर्शनकारियों को खदेड़ने के लिए पुलिस ने आंसू गैस के गोले छोड़े। लाठीचार्ज से 70 से अधिक प्रदर्शनकारियों को चोट लगी हैं, जबकि दस से अधिक गंभीर रूप से घायल हैं। 12 से अधिक पुलिसकर्मियों को भी चोटें आईं हैं। एक वाहन में आग लगाने की भी सूचना है। पुलिस ने सौ से अधिक छात्रों को हिरासत में लिया है। एहतियात के तौर पर पटेल चौक और जनपथ मेट्रो स्टेशन को बंद करना पड़ा, हालांकि शाम को इन्हें खोल दिया। उधर, छात्रों के विरोध प्रदर्शन को देखते हुए विश्वविद्यालय दो दिन बंद रहेगा।


 

नागरिकता संशोधन अधिनियम के विरोध में आइसा, एनएसयूआई, स्टूडेंट ऑफ इस्लामिक ने जामिया कैंपस से मार्च निकाल कर संसद भवन का घेराव करने का आह्वान किया था। दोपहर करीब 12 बजे छात्र संगठनों के अलावा आम छात्र व जामिया के युवा जामिया कैंपस के बाहर प्रदर्शन में शामिल होने जुटे। करीब तीन बजे प्रदर्शनकारी जैसे ही संसद की ओर बढ़ने लगा। पुलिस ने उन्हें बैरिकेड्स लगाकर रोक दिया। पुलिस फोर्स के मुकाबले प्रदर्शनकारियों की संख्या हजारों में थी। ऐसे में प्रदर्शनकारियों को रोकना मुश्किल था। करीब चार बजे पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को पहले लाठी के दम पर रोकने की कोशिश की, लेकिन नाकाम होने पर आंसू गैस के गोले छोड़े। इससे गुस्साए छात्रों ने पुलिस पर पथराव कर दिया। छात्रों को तितर-बितर करने के लिए पुलिस ने वाटर कैनन का इस्तेमाल करने के साथ ही आंसू गैस के गोले छोड़े। इसके बावजूद छात्र बैरिकेडिंग फांद कर आग बढ़ने लगे। घायल छात्रों को अस्पताल ले जाया गया।
कैंपस में घुसकर पीटा
प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि आंसू गैंस के गोले दागने पर बड़ी संख्या में छात्र कैंपस में घुस गए। गेट खुले होने के कारण पुलिस भी अंदर पहुंच गई और कैंपस के अंदर भी लाठीचार्ज किया व आंसू गैस के गोले छोड़े। लॉन में बैठे छात्रों को भी पुलिस की लाठियां झेलनी पड़ी। जामिया के छात्र इमरान, अजीम के मुताबिक पुलिस ने परदे पहनकर कैंपस में पढ़ाई कर रही छात्राओं को भी नहीं बख्शा। पुलिस ने उन पर लाठीचार्ज किया है। आइसा की पदाधिकारी कबलप्रीत के मुताबिक पुलिस ने लाठीचार्ज किया इससे माहौल बिगड़ा। लोकतंत्र में किसी को भी अपना विरोध दर्ज करने का अधिकार है। सरकार पुलिस की मदद से जनता की आवाज को दबा नहीं सकती है